मुख्यमंत्री भगवंत मान का DM केस की CBI जांच से साफ इनकार करने के बाद, अकाली नेता बिक्रम मजीठिया का भगवंत मान पर पलटवार। अपने गुंडे और भ्रष्ट मंत्री को बचाने के लिए घमंडी मुख्यमंत्री ने CBI को जांच सौंपने से इनकार कर दिया, ऐसा कहना है बिक्रम सिंह मजीठिया का। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने अपने भ्रष्ट मंत्री का पक्ष लेकर अपने भ्रष्टाचार, घमंड और पंजाब विरोधी होने का बड़ा सबूत दिया है।
मुख्यमंत्री भगवंत मान का DM केस की CBI जांच से साफ इनकार करने के बाद, अकाली नेता बिक्रम मजीठिया का भगवंत मान पर पलटवार करते हुए कहा कि अपने गुंडे और भ्रष्ट मंत्री को बचाने के लिए घमंडी मुख्यमंत्री ने CBI को जांच सौंपने से इनकार कर दिया। उन्होंने दोहराया कि मुख्यमंत्री ने अपने भ्रष्ट मंत्री का पक्ष लेकर अपने भ्रष्टाचार, घमंड और पंजाब विरोधी होने का बड़ा सबूत दिया है। उन्होंने आगे कहा कि जैसे पंजाब के बहादुर लोगों ने गुंडे लालजीत को “अंदर” भेजा है, वैसे ही वे ‘AAP’ की घमंडी सरकार को सत्ता से बाहर भेजेंगे।
मजीठिया ने कहा कि घमंडी मुख्यमंत्री को अपनी सत्ता के नशे में छोटे बच्चों, बूढ़ी मांओं और विधवा पढ़ी-लिखी पत्नियों का दर्द नहीं दिख रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि विधानसभा में महिलाओं की इज्ज़त और सम्मान की दुहाई देने वाली AAP महिला MLA कहां हैं, उन्हें एक पीड़ित विधवा महिला का दर्द क्यों नहीं दिख रहा। उन्होंने कहा कि भगवंत मान के मंत्री ने जो हालात बनाए हैं, उस परिवार को इंसाफ दिलाने के लिए वह किसी भी कॉमन प्लेटफॉर्म पर लड़ने को तैयार हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पंजाब अब अत्याचारी और शराबी मुख्यमंत्री के घमंडी राज को जड़ से उखाड़ फेंकने के लिए तैयार है और इस सरकार के ज़ुल्मों का अंत बहुत करीब है।
चंडीगढ़ 24 मार्च ( ) – शिरोमणि अकाली दल के सीनियर लीडर और पूर्व मंत्री स. बिक्रम सिंह मजीठिया ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान ने डॉ. गगन रंधावा के पॉलिटिकल मर्डर केस की CBI जांच कराने से मना करके अपने मंत्रियों की गतिविधियों को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने कहा कि जिस तरह पंजाब के लोगों ने लालजीत को “अंदर” भेजा है, उसी तरह यह माहौल सरकार के खिलाफ बन रहा है।
उन्होंने कहा कि आम लोगों की बात करके सत्ता में आई सरकार अब लोगों की भावनाओं को समझने में असफल रही है। मृतक गगन रंधावा के परिवार—छोटे बच्चों, बुज़ुर्ग मां और विधवा पत्नी—के दर्द का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इस दुख को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया पर भी सवाल उठ रहे हैं।
मजीठिया ने आरोप लगाया कि सरकार ने अपने कुछ मंत्रियों के मामलों में पहले भी क्लीन चिट दी है और अब भी उसी तरह का रुख अपनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पंजाब के लोग अब इन मुद्दों को लेकर सजग हैं और आगे आने वाले समय में इसका असर दिखाई दे सकता है।
उन्होंने कहा कि सत्ता, पद और शोहरत स्थायी नहीं होते और समय के साथ परिस्थितियां बदलती हैं। उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले में पारदर्शिता और निष्पक्षता बहुत जरूरी है।
आगे उन्होंने कहा कि विधानसभा में महिलाओं के सम्मान की बात करने वाले नेताओं को भी इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि वह पीड़ित परिवार के साथ खड़े हैं और उन्हें न्याय दिलाने के लिए हर स्तर पर प्रयास करेंगे।
बिक्रम मजीठिया ने राज्य की कानून-व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पहले एफआईआर की कॉपी मुफ्त मिलती थी, लेकिन अब इसके लिए शुल्क लिया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि राज्य में अलग-अलग घटनाओं को लेकर लोग चिंतित हैं और इस पर गंभीर ध्यान देने की जरूरत है।
