PM मोदी बोले—यह 2014 से पहले वाला भारत नहीं, नया भारत है

देश को पहली हाइड्रोजन ईंधन से चलने वाली ट्रेन की सौगात मिल गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरियाणा के जींद से इस आधुनिक ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इसके साथ ही भारत हाइड्रोजन ट्रेन शुरू करने वाला दुनिया का पांचवां देश बन गया है।

पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ के दौरे पर पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरियाणा में देश की पहली हाइड्रोजन ईंधन से चलने वाली ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह ट्रेन जींद और सोनीपत के बीच चलेगी। इससे पहले हाइड्रोजन ट्रेनें केवल जर्मनी, फ्रांस, स्वीडन और चीन में ही संचालित हो रही थीं। इसके साथ ही भारत हाइड्रोजन ट्रेन शुरू करने वाला दुनिया का पांचवां देश बन गया है।

इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि यदि होरमुज़ जलडमरूमध्य में युद्ध जैसे हालात बनते हैं तो उसका सीधा असर भारत पर भी पड़ता है। उन्होंने कहा कि इसी समुद्री मार्ग से देश में पेट्रोल, डीजल, खाद और कई अन्य आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति होती है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि यदि 2014 से पहले ऐसी स्थिति बनती तो भारत का रेलवे नेटवर्क गंभीर संकट का सामना कर सकता था, क्योंकि उस समय रेलवे का बड़ा हिस्सा डीजल इंजनों पर निर्भर था। यदि डीजल की आपूर्ति प्रभावित होती तो ट्रेनों का संचालन भी प्रभावित हो सकता था।

उन्होंने कहा कि अब हालात बदल चुके हैं। यह 2014 से पहले वाला भारत नहीं, बल्कि नया भारत है। प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ने समय रहते भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए रेलवे के विद्युतीकरण पर तेजी से काम किया है।

उन्होंने बताया कि भारत में रेलवे के विद्युतीकरण की शुरुआत वर्ष 1925 में हुई थी, लेकिन 1925 से 2014 तक लगभग 90 वर्षों में देश के रेलवे नेटवर्क का केवल 30 प्रतिशत ही विद्युतीकरण हो पाया था, जबकि 70 प्रतिशत रेलवे डीजल इंजनों पर निर्भर थी।

प्रधानमंत्री ने कहा कि यदि उसी गति से काम चलता रहता तो पूरे रेलवे नेटवर्क का 100 प्रतिशत विद्युतीकरण होने में लगभग 200 वर्ष और लग जाते। लेकिन पिछले 12 वर्षों में स्थिति पूरी तरह बदल गई है। अब देश के लगभग 99 प्रतिशत रेलवे नेटवर्क का विद्युतीकरण पूरा हो चुका है।

उन्होंने कहा कि इस बड़े बदलाव का परिणाम यह है कि डीजल की आपूर्ति में बाधा आने के बावजूद भारतीय रेलवे का संचालन प्रभावित नहीं हुआ और ट्रेनें लगातार चलती रहीं। इससे देश की ऊर्जा सुरक्षा के साथ-साथ रेलवे व्यवस्था भी पहले की तुलना में अधिक मजबूत हुई है।

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